अनुरक्षण अनुभाग : संग्रह परीक्षण की आवश्यकता एवं विधियां (Maintenance Work: Stock Veification, Its Need and Methods)

इकाई 17: अनुरक्षण अनुभाग : संग्रह परीक्षण की आवश्यकता एवं विधियां (Maintenance Work: Stock Veification, Its Need and Methods) 

उद्देश्य
1. विद्यार्थियों को पुस्तकालय में अनुरक्षण अनुभाग के कार्यों से परिचित कराना, 2. संग्रह परीक्षण की विधियों के बारे में समझाना,
3. संग्रह परीक्षण के लाभ व हानि को बताना ।। संरचना
1. विषय प्रवेश 2. अनुरक्षण अनुभाग
2.1 पुस्तक व्यवस्थापन 2.2 पुस्तकों को पुस्तक शेल्फ में रखना
2.3 पारदर्शिकाओ का उपयोग 3. संग्रह परीक्षण:अर्थ एवं आवश्यकता 4. संग्रह परीक्षण के उद्देश्य 5. संग्रह परीक्षण की प्रणालियां
5.1 पुस्तकों की संख्या गिनकर 5.2 परिग्रहण रजिस्टर द्वारा 5.3 पृथक परिग्रहण रजिस्टर द्वारा
परिग्रहण क्रमांक प्रसूची द्वारा 5.5 फलक पत्रक प्रसूची द्वारा
5.6 प्रत्येक पुस्तक के लिए परीक्षण काल में कार्ड बनाकर 6. संग्रह परीक्षण के लाभ 7. संग्रह परीक्षण से हानियां 8. सारांश 9. अभ्यासार्थ प्रश्न 10. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथ सूची
5.4

1. विषय प्रवेश ।

संग्रह-प्रकोष्ठ में पुस्तकें तकनीकी अनुभाग तथा आगम-निर्गम काउंटर से लौट कर आती हैं । अनुरक्षण अनुभाग का कार्य पुस्तकों का रख-रखाव एवं उनको वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करवाना है । पुस्तकों का फलकों पर वर्गानुसार कम में व्यवस्थापन अति आवश्यक है, जिससे पाठक को पुस्तक ढूंढने में अधिक समय व्यतीत न करना पड़े साथ ही पाठक द्वारा पुस्तक पढ़ने के बाद पुस्तक को दोबारा फलक पर ठीक स्थान पर व्यवस्थित किया जा सके और इनका परिक्षण (Preservation) धूल, आर्द्रता , ताप तथा कीट से करना इस अनुभाग का कार्य है ।
अनुरक्षण अनुभाग के प्रभारी को यह देखना चाहिए कि पुस्तकों एवं पुस्तकोतार सामग्री का व्यवस्थापन एवं रख-रखाव ठीक प्रकार से हो । पुरानी पुस्तकों का व्यवस्थापन विशेष प्रकार की फलकों पर करना चाहिए । प्रभारी को अपने कर्मचारियों का परिवेक्षण के साथ-साथ उन्हें पुस्तक को वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करने का प्रशिक्षण भी देना चाहिए । 2. अनुरक्षण अनुभाग
| अनुरक्षण अनुभाग के कार्य निम्न हैं: 1. पुस्तक व्यवस्थापन 2. पुस्तकों की सुरक्षा 3. पुस्तकों की मरम्मत 4. जिल्दबंदी 5. संग्रहण परीक्षण
पुस्तकों की सुरक्षा, मरम्मत एवं जिल्दबंदी संबंधी जानकारी पृथक अध्याय में विस्तार से दी गई है । इस अध्याय में पुस्तक व्यवस्थापन के बारे में संक्षेप में तथा संग्रह परीक्षण की आवश्यकता, उद्देश्य एवं विधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की जा रही है । 2.1 पुस्तक व्यवस्थापन
पुस्तकालयों में यह पाया गया है कि पुस्तकों को फलकों पर किसी वर्गीकरण पद्धति द्वारा वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित किया जाता है । वृत्ताकार, हीनाकार, मानचित्र, नक्शों कॉम्पेक्ट डिस्क (CD-ROM), कैसिट्स आदि को साधारण पुस्तकों के साथ व्यवस्थित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि ये भिन्न-भिन्न माप, स्वरूप की होती है । कई बार विशेष वर्ग की पुस्तकों की उपयोगिता को देखते हुए इनको संग्रह प्रकोष्ठ में अलग से व्यवस्थित करने की चेष्टा की जाती है । सामान्यत: पुस्तकालय में निम्न आधार पर व्यवस्थापन किया जा सकता
| – पुस्तकों के आकार के अनुसार | – परिग्रहण क्रमांक के अनुसार
– सामग्री के अनुसार (books, periodicals, reference book etc.) –

उद्देश्य के वर्गीकरण के अनुसार (reading, leading etc.)

– पाठकों के अनुसार (Adult, Children, Women etc.) – विषय के अनुसार (Classified)
पुस्तकें खण्डित क्रम एवं समान्तर क्रम में भी व्यवस्थित की जाती है: खण्डित क्रम :
पुस्तकालय में पाठक का अधिक समय नष्ट न हों, इसलिए उन विषयों की पाठ्य सामग्री को संग्रह प्रकोष्ठ में सबसे पहले वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करते हैं । कम उपयोग में आने वाले विषयों की पुस्तक को संग्रह प्रकोष्ठ के अन्त में व्यवस्थित करते हैं । इस प्रकार से व्यवस्थापन करने से वर्गीकरण पद्धति का क्रम भंग हो जाता है, इसलिए इसे खण्डित क्रम कहते है । इसी प्रकार पत्रिकाओं, बाल साहित्य, संदर्भ – ग्रंथों, पुस्तिकाओं को भी अलग स्थान पर वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करते है । जिससे भी वर्गीकरण पद्धति भंग हो जाता है । समान्तर क्रम:
समान्तर क्रम में विभिन्न आकार / माप की पुस्तकों परी का व्यवस्थापन सामान्य पुस्तकों के समान्तर वर्गानुसार क्रम में किया जाता है । प्रत्येक रेंक / अलमारी के सबसे नीचे का फलक, जिसको अपेक्षाकृत बडा रखेंगे, जिससे उस वर्ग में रखी पुस्तकों में से वृद्धाकार पुस्तकों को वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित किया जा सके | इसी प्रकार Spine प्रत्येक वर्ग की पुस्तक के अन्त मे उस वर्ग की हीनाकार पुस्तकों को वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करते हैं । जिल्द बंदी की हुई पत्रिकाएं, जिन
Labeling books with पर वर्गिकरण क्रमांक होते है, को भी
homemade subject codes समान्तर फलकों पर वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित करते है । जिल्द पर क्रमांक अंकित करने का नमूना निम्न है
Raise Better
Fish
Label

2.2 पुस्तकों को पुस्तक शेल्फ में रखना (Stacking of Book)

इसका प्रमुख कार्य पुस्तकालय भवन उपलब्ध जगह का अधिकतम उपयोग करना होता है । शेल्विंग इस प्रकार की हो कि प्रत्येक पुस्तक तक आसानी से पहुंचा जा सके । निम्न चित्र में दो प्रकार से स्टेकिंग कों रखा गया है जिससे स्पष्ट है कि उसी जगह में दो गुना पाठ्यसामग्री रखी जा सकती है एवं उपयोग की दृष्टि से पुस्तकें पाठक की पहुंच में है ।। 2.3 पारदर्शिकाओं का उपयोग
आधुनिक काल में अधिकांश पुस्तकालयों में अबोध प्रवेश प्रणाली होती है । इस प्रणाली के अंतर्गत पाठक संग्रह प्रकोष्ठ में पुस्तकें वर्गानुसार क्रम में व्यवस्थित होती हैं, इसलिए पुस्तकों के व्यवस्थापन क्रम तथा पथ-प्रदर्शन के लिए की व्यवस्था अति आवश्यक है । इस हेतु गेगवेगाइड्स (Gangway guides) बे गाइड्स (Bay Guides), सेल्फ गाइड्स (Selfguides) तथा अन्य सामान्य परिदर्शिकाए पुस्तक संग्रह कक्ष एवं पुस्तकों तक पहुंचने में सहायक होती है । सेल्फ गाइड का एक नमूना निम्न चित्र में दिया गया हैं । इस चित्र में दिखाया गया है कि यह
अलमारी उपलब्ध पुस्तकों को कृषि पर तीन मागों में विभाजित है: Forestry, Gardening एवं General प्रत्येक भाग को एक निर्देशिका द्वारा प्रदर्शित किया गया है । 3. संग्रह परीक्षण: अर्थ एव आवश्यकता
प्राचीन काल में पुस्तकालय संग्रह सामग्री का उपयोग के स्थान पर उसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता था । पुस्तकालय सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुस्तकालय कर्मचारियों की होती थी । किन्तु आज हम देखते हैं कि पुस्तकालय प्रबंध का यह प्रयास होता है कि पुस्तकालयों का अधिकतम उपयोग हो तथा नवीनतम सामग्री उपलब्ध हो । यह कार्य तभी संभव हो सकता है जबकि पुस्तकालय प्रबंधन को यह जानकारी लगातार मिलती रहे कि पुस्तकालय में कौनसी पुस्तकें उपलब्ध हैं, कौनसी पुस्तकें चोरी हो गई या अन्य किसी कारण से उपलब्ध नहीं हो रही है अथवा उपयोग योग्य नहीं रह गई हैं ।

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