पुस्तकालय वर्गीकरण का अर्थ एवं परिभाषा

पुस्तकालय वर्गीकरण का अर्थ एवं परिभाषा

इकाई परिचय इकाई-1- इस इकाई में पुस्तकालय वर्गीकरण का अर्थ एवं परिभाषा को समझते हुये इसकी
पुस्तकालय में आवश्यकता एवं उद्देश्यों की चर्चा की गयी है। पुस्तकालय में वर्गीकरण
के विभिन्न कार्यों एवं उपयोग पर प्रकाश डाला गया है।
इकाई-2- अभिधारणाओं एवं अभिधारणा अभिगम के अर्थ एवं उसकी आवश्यकता को स्पष्ट किया
गया है। प्रायोगिक वर्गीकरण में अभिगम के अनुप्रयोग की उपयोगिता को स्पष्ट किया गया है एवं प्रायोगिक वर्गीकरण के सोपान-दर-सोपान को उदाहरण सहित समझाया
गया है।
इकाई-3- इस इकाई में मूलभूत श्रेणियों का अर्थ, आवश्यकता, परिभाषा एवं इनसे सम्बन्धित
दृष्टिकोण की विस्तार से चर्चा की गयी है। पाँच मूलभूत श्रेणियाँ व्यक्तित्व, पदार्थ, ऊर्जा, स्थान एवं कल की चर्चा करते हुये आवर्तन एवं स्टार की अवधारणा को समझाया गया है। पक्ष अनुक्रम एवं पक्ष अनुक्रम की अभिधारणाओं को स्पष्ट किया
गया है।
इकाई-4- पक्ष विश्लेषण, पक्ष अनुक्रम की अभिधारणाओं को समझाया गया है। पक्ष अनुक्रम के
विभिन्न सिद्धान्तों को उदाहरण सहित स्पष्ट किया गया है। इकाई के अंत मे
| अभ्यासार्थ प्रश्न एवं विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची दी गयी है। इकाई-5-इस इकाई में विषय के विभिन्न पक्षों/आयामों की जानकारी दी गयी है। विषय के मध्य विभिन्न प्रकार के दशा सम्बन्धों से परिचय करवाया गाय है एवं दशा सम्बन्ध के विभिन्न प्रकारों की उदाहरण सहित व्याख्या प्रस्तुत की गयी है। इकाई-6- इस इकाई सर्वसामान्य एकलों का परिचय दिया गाय है।
डी डी सी, यू डी सी एवं विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में प्रयुक्त सर्वसामान्य एकलों की उदाहरण सहित चर्चा की
गयी है।

इकाई-7- इस इकाई में अंकन का अर्थ, परिभाषा एवं उसकी पुस्तकालय वर्गीकरण में आवश्यकता

को स्पष्ट किया गया है अंकन के प्रमुख कार्य, प्रकार, स्मरणशीलता एवं अच्छे अंकन
के गुणों की विस्तार से चर्चा की गयी है। इकाई-8- पंक्ति एवं श्रृंखला की अवधारणा को समझाया गया हैं एवं उसके उपसूत्रों के बारे में
जानकारी दी गयी है। पंक्ति एवं श्रृंखला में ग्राह्यता प्राप्त करने के लिए विभिन्न
विधियों के प्रयोग से अवगत करवाया गया है। इकाई-9- वर्गीकरण पद्धतियों में विभिन्न विधियों के प्रयोग की आवश्यकता एवं इससे होने वाले
लाभ की जानकारी दी गयी है। विबिन्दु एवं दशमलव वर्गीकरण पद्धतियों में प्रयुक्त
| विधियों की उदाहरण सहित विस्तार से चर्चा की गयी है। इकाई-10- यह इकाई क्रामक संख्या तथा उसकी संरचना से संबन्धित है। क्रामक संख्या एवं
उसकी संरचना से परिचय करवाया गया है। पुस्तक को प्रदान क्रामक संख्या के
विभिन्न भागों को स्पष्ट किया गया है। इकाई-11- इस इकाई में विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति के उद्भव, विकास, संरचना एवं प्रारूप की
जानकारी दी गयी है। पद्धति की प्रमुख विशेषताओं से अवगत करवाया गया है।
इकाई-12- यह इकाई विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति के विभिन्न संस्करणों से सम्बन्धित है। विबिन्दु

वर्गीकरण पद्धति के विकास, संरचना एवं इसके विभिन्न संस्करण- 

प्रथम से सप्तम की
विस्तार से चर्चा की गयी है। इकाई-13- इस इकाई में दशमलव वर्गीकरण पद्धति के उद्भव, विकास, संरचना एवं प्रारूप को
समझाया गया है। दशमलव वर्गीकरण पद्धति की प्रमुख विशेषताओं को चर्चा करते हुये
इस पद्धति की समीक्षा प्रस्तुत की गयी है। इकाई-14- इस इकाई में दशमलव वर्गीकरण पद्धति के 19 वें, 20 वें, एवं 21 वें संस्करणों का
संक्षेप में परिचय दिया गया है। तीनों संस्करणों का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत
किया गया है। इकाई-15- यह इकाई पुस्तकालय वर्गीकरण की वर्तमान प्रवृतियों से सम्बन्धित है। पुस्तकालय
वर्गीकरण की वर्तमान प्रवृतियों की जानकारी दी गयी है एवं वर्गीकरण में कम्प्यूटर के बढ़ते हुये योगदान की चर्चा की गयी है।
इकाई – 1 : पुस्तकालय वर्गीकरण : आवश्यकता, उद्देश्य एवं कार्य (Library classification : Need purpose and Functions)
उद्देश्य
पुस्तकालय में पुस्तक-संग्रह को सुव्यवस्थित क्रम में रखने के आवश्यकता की जानकारी
देना,

2. पुस्तकालय के उद्देश्य एवं उसकी आवश्यकता से अवगत करवाना,

3. पुस्तकालय वर्गीकरण के अर्थ, उसकी परिभाषा एवं उसके कार्यों का ज्ञान प्रदान करना । संरचना/विषय वस्तु
1. विषय प्रवेश 2. पुस्तकालय वर्गीकरण का अर्थ 3. पुस्तकालय वर्गीकरण की परिभाषा 4. पुस्तकालय वर्गीकरण की आवश्यकता व उद्देश्य 5. पुस्तकालय वर्गीकरण के कार्य 6. सारांश । 7. अभ्यासार्थ प्रश्न 8. पारिभाषिक शब्दावली
9. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची। 1. विषय प्रवेश ।
हमें ज्ञात है कि आधुनिक काल में पुस्तकालय अनेक प्रकार की पुस्तकों/प्रलेखों का संग्रह करते हैं, जैसे: – मुद्रित प्रलेख/पुस्तक, हस्तलिखित ग्रंथ, मानचित्र, चार्ट, सूक्ष्म प्रलेख, दृश्य-श्रव्य कैसेट आदि । इन प्रलेखों में निहित विषय वस्तु का समाज के हित में अधिक से अधिक उपयोग बढाना प्रत्येक पुस्तकालय का प्रमुख उद्देश्य माना जाता है । प्रलेखों के उपयोग को बढाने के लिये पुस्तकालय में इनको सुनियोजित क्रम में व्यवस्थित करना आवश्यक होता है।
आधुनिक पुस्तकालयों में किसी विशिष्ट प्रलेख की, पाठक प्रायः तीन प्रकार से मांग करते हैं। वे प्रलेख के लेखक या प्रलेख की आख्या के नाम से किसी प्रलेख की मांग कर सकते हैं; अथवा इसके अतिरिक्त उन्हें किसी विशिष्ट विषय पर आधारित पुस्तकों की आवश्यकता हो सकती है । इस अभिगम को विषय अभिगम के नाम से जाना जाता है । प्रायः सभी पुस्तकों में अधिकांश पाठक किसी विशिष्ट विषय पर आधारित पुस्तक या पुस्तकों की मांग करते हैं । क्योंकि आधुनिक काल में प्रत्येक क्षेत्र में प्रलेखों के प्रकाशन की अत्यधिक भरमार होने के कारण श्रेण्य पुस्तकों (Classics) को छोड़कर पाठक के लिये प्रत्येक पुस्तक के लेखक या उसकी आख्या का ठीक-ठीक अनुस्मरण करना प्रायः कठिन होता है ।

पुस्तकालय वर्गीकरण के कार्य 

इसके अतिरिक्त यदि प्रलेखों को लेखकों के नाम अथवा उनकी आख्याओं के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है तो एक ही विशिष्ट विषय से संबंधित प्रलेख निधानियों पर अथवा प्रसूची में विभिन्न स्थानों पर बिखर जायेंगे, तथा सहसंबंधित विषयों के प्रलेख भी तितर-बितर हो जायेंगे । प्रायः पाठकों को प्रलेखों की आख्यायें ठीक-ठीक याद नहीं रहती; तथा पाठक को अपनी अभीष्ट आख्या के अनुसार प्रलेख को ढूंढना कठिन हो जाता है । अत: लेखक एवं आख्या के अनुसार की गई व्यवस्था सहायक नहीं होती । बहुत से लेखकों के नाम की वर्तनी (वर्ण-विन्यास ) भी ठीक-ठीक याद नहीं रहती अतः विषयानुसार व्यवस्था ही पाठकों के लिये सहायक मानी जाती है । विषय अभिगम के माध्यम से पुस्तकालय के संग्रह से अज्ञात ग्रंथों को भी प्राप्त किया जा सकता है, तथा वर्गीकरण वह साधन है जिसके द्वारा इस अभिगम को सुगम बनाया जा सकता है । पुस्तकालय वर्गीकरण के माध्यम से पुस्तकालय में अध्ययन सामग्री को विषयानुसार व्यवस्थित किया जाता है । इस प्रकार व्यवस्थापन को सहायक अनुक्रम में सुनियोजित व्यवस्थापन की संज्ञा दी जाती है । 

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