भौगोलिक परम्परागत वर्णानुसार शीर्षकानुसार विषयानुसार नामानुसार कालक्रमानुसार

भौगोलिक परम्परागत वर्णानुसार शीर्षकानुसार विषयानुसार नामानुसार कालक्रमानुसार

डा. एस.आर. रंगनाथन ने इन सर्वसामान्य एकलों को व्यवस्थित करने के लिए निम्नलिखित परिसूत्र की परिकल्पना की –
L का आशय ‘भाषा’ से है । इसके एकल कोलन क्लैसिफिकेशन (छठा संस्करण) के वितीय भाग के 5वें अध्याय पृष्ठ संख्या 2.26 और 2.27 में दिये गये हैं ।
F का आशय ‘रूप’ (Form) से है | पृष्ठ 2.3 पर इनका उल्लेख किया गया है । ये इस प्रकार हैं ।। | a वर्ग क्रम
(Systematical)
 (Alphabetical) (Chronological) (Index) Systematical) (Alphabetical) (Title) (Subject) (Author) (list) (Systematical) (numerical)
 अन्य प्रकार
c57
तथ्य / आंकड़े नमूना / पैटर्न नुसखा चित्र मूर्ति नक्काशी लेखाचित्र / चित्रकला रंग चित्र छायाचित्र चलचित्र ध्वनि चलचित्र
पारदर्शी चित्र ठप्पा मानचित्र / नक्शा सेक्शन नक्शा उत्थापन नक्शा उभार दार नक्शा ग्राफ / लेखाचित्र रेखा / चित्र हिस्टोग्राम परिद्रश्य स्कीमेटिक पैरोडी । विडम्बकारी रूपान्तर प्रनोत्तरी विचार
 (Press Cutting) कतिपय उदाहरण दिये जा रहे हैं:2:51N3 111qN60 Colon Classification by S.R Ranganathan
यहाँ 111 अंग्रेजी भाषा का द्योतक है | q का प्रयोग Code के लिये किया गया है । N60 प्रकाशनवर्ष के लिए है ।।
2:51N3 152vN89 जी.एस चम्पावत रचित, विबिन्दु वर्गीकरणः प्रायोगिक अध्ययन। यहाँ ग्रंथांक में दिया गया 152 हिन्दी भाषा का द्योतक है । v का प्रयोग व्यवहारात्मकता । प्रयोगात्मकता के लिये किया गया है । M89 प्रकाशन वर्ष का प्रतिनिधित्व कर रहा है ।
a44, 144 111c3N90.1-2. Press in India, 2 Vols.
इस उदाहरण में 111 अंग्रेजी भाषा का द्योतक है । c3 भौगोलिक सूची को बता रहा है | N90 प्रकाशन वर्ष के लिये है । 1 एवं 2 पुस्तक के दो खण्डों में होने का संकेत दे रहे

4.3 संग्रहांक से सम्बन्धित सर्वसामान्य एकल

इस श्रेणी में आने वाले सर्वसामान्य एकलों का उल्लेख एस.आर. रंगनाथन ने अपनी पुस्तक कोलन क्लैसिफिकेशन (छठा संस्करण) के प्रथम खण्ड में पृष्ठ 1.18 में किया गया हैं। इनका प्रयोग ग्रंथाक (Book Number) के ठीक ऊपर लिखकर किया जाता है:
इसी आधार पर अन्य ओर संग्रहों के लिये भी सर्वसामान्य एकलों का निर्माण किया जा सकता है । जैसे
Text book library science TBV
Text book History इन सर्वसामान्य एकलों के अतिरिक्त कुछ प्रतीकों का प्रयोग भी किया जाता है । जैसे: लघु आकार की पुस्तक
: ग्रंथाक को रेखांकित करना: वृहद आकार की पुस्तक | : ग्रंथांक के ऊपर रेखा खींचना । असामान्य आकार की पुस्तक : ग्रंथांक के ऊपर और नीचे रेखा खींचना ।। जीर्ण-शीर्ण पुस्तक
: ग्रंथांक को घेरे में कर देना । उदाहरण :- R65, 6 152 POO श्रीमद्भाग्वद्गीता यहाँ ग्रंथांक को रेखांकित कर यह दर्शाया गया है कि यह लघु पुस्तिका है । O142,IA2 J58 महाभारत यहाँ ग्रंथांक के ऊपर रेखा खींचकर यह दर्शाया गया है कि यह वृहदाकार पुस्तक है । 015 gx H15, I M86 विद्याधर : एकावली
यहाँ ग्रंथांक को घेरे में देकर यह दर्शाया गया है कि यह ग्रंथ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। 5. सारांश
इस इकाई में सर्वसामान्य एकलों से परिचय करवाया गया है । पुस्तकालय वर्गीकरण की विभिन्न पद्धतियों में दशमलव वर्गीकरण पद्धति, सार्वभौम दशमलव वर्गीकरण पद्धति एवं विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में सर्वसामान्य एकलों के प्रयोग को उदाहरण सहित स्पष्ट किया गया है । विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में सर्वसामान्य एकल पूर्ववर्ती सर्वसामान्य एकल (ACI) पश्चवर्ती सर्वसामान्य एकल (PCI) की उदाहरण सहित विस्तार से चर्चा की गयी है । इकाई के अन्त में अभ्यास के लिए प्रश्न एवं विस्तृत अध्ययन के लिए ग्रन्थ सूची भी दी गयी है । 6. अभ्यासार्थ प्रश्न

1. सर्वसामान्य एकलों का पुस्तकालय वर्गीकरण में क्या महत्व है? 

2. डी डी सी में प्रयुक्त मानक उपविभाजनों का विवेचन करें । 3. यू डी सी में प्रयुक्त सामान्य सहायकों के प्रकारों का उल्लेख करें ।
4. सी सी में सर्वसामान्य एकलों के प्रकारों की उदाहरण सहित व्याख्या करें । 7. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रंथसूची 1. Ranganathan S.R, Colon Classification Ed 6 Reprint. Bangalore,
Sarda Ranganathan Endowment for Library Science 2000 2. Krishan kumar, Theory of Classification, Vikas Publishing House,
New Delhi, 1985 3. चम्पावत, जी एस., पुस्तकालय वर्गीकरण, जयपुर, आर.बी.एस.ए. पब्लिशर्स, 1993
इकाई- 7: अंकन – आवश्यकता, कार्य, प्रकार और स्मरणशीलता (Notation- Need , Functions , Types and Mnemonics)
उद्देश्य
| इस इकाई के अध्ययन के उपरान्त आप अंकन के बारे में निम्न जानकारी प्राप्त कर सकेगें:
1. अंकन का अर्थ व उसकी परिभाषा से अवगत होना 2. पुस्तकालय वर्गीकरण में अंकन की आवश्यकता से परिचित होना, 3. अंकन के प्रमुख कार्य और प्रकार से अवगत होना,
4. अच्छे अंकन के गुण तथा स्मरणशीलता से परिचित होना ।। संरचना / विषय वस्तु
1. विषय प्रवेश 2. अंकन का अर्थ 3. अंकन की आवश्यकता, कार्य और प्रकार
3.1 अंकन की आवश्यकता 3.2 अंकन के कार्य
3.3 अंकन के प्रकार 4. अंकन में प्रयुक्त होने वाले अंकों / प्रतीकों के प्रकार 5. अंकन के गुण 6. स्मरणशीलता।
6.1 वर्णात्मक स्मृति सहायक 6.2 अनुसूचित स्मृति सहायक 6.3 व्यवस्थित स्मृति सहायक
6.4 मौलिक समृति सहायक 7. सारांश 8. परिभाषिक शब्दावली 9. अभ्यासार्थ प्रश्न
10. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची 1. विषय प्रवेश
अंकन पुस्तकालय वर्गीकरण का आधार है जो कि इसे ज्ञान वर्गीकरण से पृथक करता है । अंकन के दारा पुस्तकालय में प्रलेखों को फलकों एवं उनकी प्रविष्टियों (Entries) तथा
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अन्य ग्रंथ विज्ञानात्मक सामग्री (Biobliographical tools) को यांत्रिक क्रम (Mechanical order) 

में व्यवस्थित किया जाता है ।
प्रस्तुत इकाई में आपको अंकन से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं जैसे अंकन के अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, कार्य, प्रकार, गुण, स्मरणशीलता आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई गयी है ।। 2. 3icho al 372€ (Meaning of Notation)
पुस्तकालयों में प्रलेखों को सहायक अनुक्रम में व्यवस्थित करने हेतु किसी वर्गीकरण पद्धति का उपयोग किया जाता है । वर्गीकरण पद्धति में पुस्तक के विषय का प्रतिनिधित्व किसी संख्या या चिन्ह के द्वारा किया जाता है, जैसे इयूई दशमलव वर्गीकरण पद्धति (डी.डी.सी. ) में धर्म, सामाजिक विज्ञान, भाषा, इतिहास का प्रतिनिधित्व क्रमशः 200, 300, 400 तथा 900 से किया जाता है । विबिन्दु वर्गीकरण (सी.सी.) पद्धति में अर्थशास्त्र, वनस्पति शास्त्र, चिकित्सा आयुर्विज्ञान, राजनीति शास्त्र का प्रतिनिधित्व क्रमशः X, I, L,W से किया जाता है । यहाँ ध्यान में रखने योग्य बात यह है कि वर्गीकरण पद्धतियों में अंकन केवल संख्याओं या अक्षरों तक ही सीमित नहीं है । इनका निर्माण किसी भी अंक, किसी भी चिन्ह, किसी भी अक्षर, किसी भी प्रतीक आदि के द्वारा या इनके समूहों द्वारा हो सकता है । अर्थात अंकन एक कृत्रिम भाषा है जिसका प्रयोग उस प्राकृतिक भाषा के बदले में किया जाता है जिसमें प्रलेख की विषय वस्तु लिखी गयी है | यह पद्धति के निर्माणकर्ता पर निर्भर करता है कि वह इस कृत्रिम भाषा को बनाने के लिये किस प्रकार के अंकों व चिन्ह का प्रयोग करता है । सम्बन्धित वर्गिकरण पद्धति में प्रयुक्त सारे चिन्ह या संख्याओं को मिलाकर उस पद्धति की अंकन व्यवस्था (Notational System) बनती है ।

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