विबिन्दु वर्गीकरण पद्दति का प्रायोगिक उपयोग

इकाई 1: विबिन्दु वर्गीकरण पद्दति का प्रायोगिक उपयोग :

इसमें विबिन्दु वर्गीकरण पद्दति में उपयोग में ली गई अंकन पद्दति से आपके परिचित कराया गया है। सामान्य अनुक्रमणिका से मुख्य वर्गों तक पहुंचने की प्रकिया की जानकारी भी दी गई है ।
इकाई 2 : मूल वर्गों के अनुसार प्रायोगिक वर्गीकरण PME के संदर्भ में : इस इकाई में मुख्य वर्गों के क्षेत्र एवं परिसूत्रों का परिचय दिया गया है। साथ ही परिसूत्रों के विश्लेषण की जानकारी दी गई है ताकि आप किसी भी मुख्य वर्ग में परिसूत्र के अनुसार PME का उपयोग करते हुए शीर्षक के वर्गीक बना सकें। | इकाई 3 : प्रमाणिक वर्गों के अनुसार प्रायोगिक वर्गीकरण PME के संदर्भ में इस इकाई में इकाई 2 की भांति उन मुख्य वर्गों के क्षेत्र एवं परिसूत्रों का परिचय दिया गया है जिनमें प्रामाणिक वर्ग बने हुए है एवं उनका उपयोग हुआ है। परिसूत्रों की अनुसार इन प्रामाणिक वर्गों में PME का उपयोग करते हुए शीर्षक के वर्गीक बनाये जा सकते है ।
इकाई 4 : स्थान पक्ष [S] का प्रायोगिक उपयोग : इस इकाई में स्थान पक्ष का सामान्य परिचय देते हुए स्थान पक्ष के स्तरों की जानकारी दी गई है । स्थान पक्ष के प्रायोगिक उपयोग एवं भौगोलिक विधि के रूप में स्थान पक्ष के उपयोग को उदाहरण सहित समझाया गया है ।

इकाई 5 : काल पक्ष [T] का प्रायोगिक उपयोग : 

इस इकाई में काल पक्ष की सामान्य जानकारी, काल पक्ष के स्तर एवं काल पक्ष के प्रायोगिक उपयोग को समझाया गया है । काल पक्ष का कालक्रम विधि के रूप में प्रायोगिक उपयोग को उदाहरण सहित समझाया गया है ।
इकाई 6 : पूर्ववर्ती सामान्य एकलों (ACI) का प्रायोगिक उपयोग : इस इकाई में एकलों के प्रकार बताते हुए पूर्ववर्ती एकलों के विभिन्न प्रकारों के उपयोग उदाहरण सहित समझाये गये है।
इकाई 7: परवर्ती सामान्य एकलों (PCI) का प्रायोगिक उपयोग : इस इकाई में परवर्ती सामान्य एकलों का परिचय दिया गया है । इसके विभिन्न प्रकारों का प्रायोगिक उपयोग उदाहरण सहित समझाया गया है।
| इकाई 8 : दशा संबंध का प्रायोगिक उपयोग : इस इकाई में दशा संबंधों का अर्थ, दशा संबंधों के स्तर एवं प्रकारों के उपयोग को उदाहरण सहित समझाया गया है ।
| इकाई 9 : इयूई दशमलव वर्गीकरण (19वां संस्करण) का प्रायोगिक परिचय, में इस पद्दति के विकास तीनों खण्डों में शामिल जानकारी एवं इनके उपयोग एवं वर्गीक बनाने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया है।
इकाई 10 : सापेक्ष अनुक्रमणिका का प्रयोग : इस इकाई में अनुक्रमणिका के महत्व,विस्तार ,पृष्ठ के स्वरूप, संरचना, निर्देश, आदि से अवगत करवाकर यह समझाने का प्रयास किया है कि अनुक्रमणिका की सहायता से अनुसूची एवं सारणियों तक कैसे पहुंचा जा सकता है ।।
इकाई 11 : मानक उपविभाजनों का प्रयोग : इस इकाई में मानक उपविभाजनों की विशेषताएं एवं उपयोग को उदाहरण सहित विस्तार से समझाया गया है ।।

इकाई 12 : भौगोलिक उपविभाजन का प्रयोग : 

इस इकाई में भौगोलिक उपविभाजन के उपयोग की विधि को उदाहरण सहित बताया गया है ।
इकाई 13 : विशिष्ट साहित्य उपविभाजनों का प्रयोग : इस इकाई में साहित्य. उपविभाजनों की व्याख्या करते हुए इनके उपयोग को उदाहरण सहित समझाया गया है ।
इकाई 14 : भाषा विषयक उपविभाजन : इस इकाई में सारणी 4 विशिष्ट भाषा विषयक उपविभाजनों एवं सारणी 6 भाषाओं के उपयोग
को उदाहरण सहित बताया गया है ।
इकाई 15 : इस इकाई में सारणी 5 जातीय वंशानुगत एवं राष्ट्रजन समूह के उपयोग को उदाहरण सहित स्पष्ट किया गया है ।।
इकाई 16 : जोड़िए’ निर्देशानुसार वर्ग संख्या निर्माण : इस इकाई में ‘जोड़िए’ निर्देशों की जानकारी प्रदान कर इनके उपयोग को उदाहरण सहित समझाया गया है ।।
इकाई 17 : बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग संख्या निर्माण : इस इकाई में बहु संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वर्ग निर्माण की विधि की जानकारी दी गई है एवं विभिन्न तालिकाओं से बहुसंश्लेषित वर्ग संख्याओं का निर्माण करने की प्रक्रिया को समझाया गया है ।
इकाई 1 : विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति का प्रायोगिक उपयोग उद्देश्य
1. विबिन्दु वर्गीकरण के उद्भव एवं विकास की जानकारी देना, 2. दविबिन्दु वर्गीकरण संस्करण 6 (पुनर्मुद्रित) की संरचना एवं रूपरेखा का सामान्य
परिचय देना, 3. विबिन्दु वर्गीकरण की वैश्लेषी-संश्लेषणात्मक प्रक्रिया की विवेचना करना, 4. विबिन्दु वर्गीकरण में उपयोग की गई अंकन पद्धति से परिचित कराना 5. विबिन्दु वर्गीकरण में विषयों की स्थिति के चित्रण की जानकारी देना
6. अनुक्रमणिका के प्रायोगिक उपयोग का विवरण देना संरचना/विषय वस्तु 1. विषय प्रवेश

1.1 विबिन्दु वर्गीकरण का उद्भव एवं विकास 

2. विबिन्दु वर्गीकरण संस्करण 6: संरचना एवं रूपरेखा
2.1 भाग 1 – नियम । 2.2 भाग 2 – वर्गीकरण अनुसूचियाँ
2.3 भाग 3- वरेण्य ग्रन्थ व धार्मिक ग्रन्थ 3. विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में प्रयुक्त अंकन 4. विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति में विषयों की स्थिति का चित्रण 5. मूलभूत श्रेणियाँ 6. वैश्लेषी-संश्लेषणात्मक स्वरूप 7. अनुक्रमणिका प्रायोगिक उपयोग 8. परिशिष्ट उपयोगिता 9. सारांश 10. अभ्यासार्थ प्रश्न 11. मुख्य शब्द
12. विस्तृत अध्ययनार्थ ग्रन्थ सूची 1. विषय प्रवेश
ग्रन्थालयों में प्रयोग में लायी जाने वाली अनेक वर्गीकरण पद्धतियों का अब तक विकास हो चुका है। एस.आर. रंगनाथन द्वारा रचित एवं विकसित विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति भी इसी प्रकार की एक पद्धति है। यह पद्धति स्वयं रंगनाथन द्वारा प्रतिपादित वर्गीकरण के सामान्य सिद्धान्तों पर आधारित है। यह अन्य उपलब्ध वर्गीकरण पद्धतियों से मौलिक रूप में पूर्णतया भिन्न है। यह मुक्त पक्षात्मक वर्गीकरण पद्धति है। निरन्तर वर्धनशील बहुआयामी विषय जगत का सफलता से वर्गीकरण करने में यह पद्धति पूर्णत: सक्षम है। अब तक इसके सात संस्करण गरित है। यह वे स्वयं रंगनाथन द्वारा प्रतिपवर्गीकरण पद्धति भी इसी
प्रकाशित हो चुके हैं किन्तु पाठ्यक्रम के अनुसार प्रस्तुत इकाई में इसके छठे संस्करण के प्रायोगिक उपयोग की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

1.1 विबिन्दु वर्गीकरण का उद्भव एवं विकास

विबिन्दु वर्गीकरण की रचना के विचार का सूत्रपात एस.आर. रंगनाथन के मस्तिष्क में उस समय हुआ जब वे 1924 में लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइब्रेरियनशिप में ग्रन्थालय विज्ञान का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे इसी समय इन्होंने वहां खिलौनों की दुकान पर एक मैकानोसेट का प्रदर्शन देखा। इस प्रदर्शन में उन्होंने देखा कि मैकानोसैट में अनेक खांचेदार पट्टियां, शलाकायें, पेच, नट व बोल्ट थे तथा इन्हें अलग-अलग तरह से जोड़कर विभिन्न मॉडल बनाये जा सकते थे। इसी आधार पर उन्होंने विचार किया कि मैकानोसैट की पट्टियों के समान किसी विषय की मानक इकाइयों (पक्षों) को भी नट व बोल्टों के समान विबिन्दु (Colon) (:) योजक चिह्न से जोड़कर विविध रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है। इस प्रकार मानक इकाइयों ने अनुसूचियों का रूप धारण कर लिया तथा वर्ग संख्या का निर्माण करने के लिये आरंभ में विबिन्दु का (:) योजक चिन्ह के रूप में प्रयोग किया गया। इसलिये इस वर्गीकरण पद्धति का नाम विबिन्दु वर्गीकरण (Colon Classification) रखा गया।

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