विषय वर्ग संख्या (पूर्ववर्ती सामान्य एकल) [P], [P2]

विषय वर्ग संख्या (पूर्ववर्ती सामान्य एकल) [P], [P2]

इसी श्रेणी के एकल अपने पक्ष परिसूत्र के साथ विबिन्दु वर्गीकरण के छठे संशोधित संस्करण में पृ. 2.5 पर दिए गए हैं। तथा इनके प्रयोग से सम्बन्धित नियम पृ. 1.43 – 1.47 पर दिए गए हैं। अधिकतर एकलों के साथ उनके पक्ष परिसूत्र भी दिए गए हैं, जिनमें एक अथवा दो पक्षों को जोड़ने का प्रावधान है। । विभिन्न पक्ष परिसूत्रों का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि इनमें केवल तीन मूलभूत श्रेणियों के पक्षों को जोड़ने का प्रावधान है। यह श्रेणियां हैं: व्यक्तित्व, स्थान तथा काल। विभिन्न परिसूत्रों से स्पष्ट है कि पूर्ववर्ती सामान्य एकल से जुड़ने वाला प्रथम पक्ष, चाहे वह व्यक्तित्व श्रेणी का हो या स्थान श्रेणी का अथवा समय श्रेणी का, बिना किसी योजक चिन्ह के जोड़ दिया जाता है। जिन पक्ष परिसूत्रों में द्वितीय पक्ष भी दिया है उनमें वितीय पक्ष अपनी मूलभूत श्रेणी के योजक चिन्हों के साथ जुड़ेंगे | यदि दवितीय पक्ष व्यक्तित्व है जैसे k[P], [P2] यह परिसूत्र में दर्शाए योजक चिन्हों के अनुसार जोड़ा जायेगा।
यदि वितीय पक्ष समय श्रेणी का है जैसे – v[S].[T] यह समय श्रेणी के योजक चिन्ह एकल उद्धरण चिन्ह (‘) के साथ जुड़ेगा। पक्ष परिसूत्र में समय श्रेणी का योजक चिन्ह छठे संस्करण के अनुसार दिया है जो संशोधित संस्करण में बदल दिया गया है (संलग्नक पृ. 1.9 में देखें)।
जैसा कि विभिन्न पक्ष परिसूत्रों से स्पष्ट है विभिन्न एकलों के साथ व्यक्तित्व श्रेणी के एक या दो पक्ष जोड़े जा सकते हैं। यह पक्ष उस एकल को सुस्पष्ट बनाने का कार्य करते हैं। व्यक्तित्व श्रेणी के दो पक्षों वाले एकलों का पक्ष परिसूत्र इस प्रकार लिखा जा सकता है:

इसमें [P]- भौगोलिक विधि (GD) से लिया जाता है, जो पृ. 1.45 में दिए गए

 निर्देशानुसार k कोष n क्रमिक प्रकाशन, तथा p सम्मेलन कार्यवाही के संदर्भ में, इनकी विषय वस्तु के भौगोलिक विस्तार क्षेत्र के बराबर होगा। अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए 1 विश्व की एकल संख्या ली जाएगी। चाहे वह सम्मेलन कहीं भी हो रहा हो । यदि वह सम्मेलन राष्ट्रीय स्तर का है तो उस देश की एकल संख्या ली जाएगी । m पत्रिका के संदर्भ में उपरोक्त पृष्ठ में उल्लिखित निर्देशानुसार सामान्यत: पत्रिका प्रकाशित करने वाले देश की एकल संख्या प्रयुक्त होगी।
[P2] – कालक्रम विधि (CD) से लिया जाएगा, जो पृ. 1.45 के निर्देशानुसार सामान्यत: प्रलेख के प्रथम प्रकाशन का वर्ष होगा । प्रत्येक एकल के संदर्भ में विस्तृत निर्देश इस पृ. दिये गये हैं।
जीवनी संबंधित विभिन्न एकलों के पक्ष परिसूत्रों में भी व्यक्तित्व पक्ष इसी विधि से लिया जाता है। उदाहरणार्थ
Library Science – a bibliography – 1995 पक्ष विश्लेषण.
Library Science (MC) Bibliography (ACI), 1995 [T] वर्ग संख्या : 2aN9
| इस वर्ग संख्या में समय की एकल संख्या N95 न होकर N9 है । पृ. 1.45 में दिए गए निर्देशानुसार ग्रन्थसूची के संदर्भ में समय पक्ष से ‘नवीनतम प्रभावी दशक (LED) की संख्या ली जाएगी। (LED के लिए नियम पृ. 1.49 में देखिए।)

ग्रन्थसूची की वर्गसंख्या के निर्माण की दो विधियां हैं।

(अ) किसी विषय के प्रलेखों की सूची का वर्गीकरण करना हो तो उपरोक्त विधि का प्रयोग किया जाएगा।
(ब) शीर्षकों में किसी विशिष्ट प्रकार के प्रलेखों का अथवा विशिष्ट प्रकार की ग्रन्थसूची (Generalia Bibliography) के साथ दिए गए विशिष्ट एकलों की अनुसूची (पृ. 2.29) तथा इसके प्रयोग के लिए दिए नियमों (पृ. 1.62-1.63) का उपयोग किया जाता है। उदाहरणार्थशीर्षक: Library Science Reference Books – a bibliography पक्ष विश्लेषण : Library Science (MC), Bibliography (ACI), Reference Books[P] वर्ग संख्या : 2a47 ।
Catalogue of Reference Book- ANMOL शीर्षक : Bibliography (ACI), Reference Books[P] पक्ष विश्लेषण : Publishers catalogue [P2] Annul [P3] वर्ग संख्या : a47, 3A । यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पृ.162 के नियम 9z4 के निर्देशानुसार यदि प्रलेख के विषय की वर्ग संख्या 2 -विविध, हो और उसके तुरंत बाद पूर्ववर्ती सामान्य एकल संख्या का प्रयोग किया गया हैं तब मुख्य वर्ग संख्या 2 को छोड़ दिया जाता है तथा उस प्रलेख के विषय की वर्ग संख्या पूर्ववर्ती सामान्य एकल संख्या से आरंभ की जाती है । इस प्रकार वर्ग संख्या za के स्थान पर वर्ग संख्या a से आरंभ की जाती है, उदाहरणार्थ – शीर्षक : English Dictionary पक्ष विश्लेषण: Linguistic(MC) English [P] Words [P3] Meaning [E], Dictionary (ACI) वर्ग संख्या : P111:5k | इस वर्ग संख्या में शब्द [P3] की एकल संख्या 3 को पृ.1.106 के नियम P44 के अनुसार छोड़ दिया गया है। शब्द कोषों की वर्ग संख्या निर्माण से संबंधित अन्य नियम भी इसी अध्याय (अर्थात भाषा विज्ञान) में दिए गए हैं। इसी प्रकार, विभाषीय शब्दकोषों के लिए पृ. 1.106 में नियम P9k दिया हुआ है। इस नियम के अनुसार एक विभाषीय शब्दकोष की वर्गसंख्या बनाते समय उस भाषा को वर्गीकृत किया जाता है जिसमें शब्द दिए हुए हैं। तथा जिस भाषा में शब्दों के अर्थ दिए हैं उसे पुस्तक संख्या के प्रथम भाग में दिया जाता है। अत: अंग्रेजी-हिन्दी शब्दकोष की वर्ग संख्या भी P111: 4k ही होगी । वास्तविक पुस्तक को वर्गीकृत करते समय पुस्तक संख्या वाले भाग में हिन्दी की एकल संख्या दिये जाने का प्रावधान है। इस बारे में इकाई संख्या 2 में P main class में विस्तार से समझाया गया है।

विशिष्ट विषयों के शब्दकोषों के संदर्भ में 

पृ. 1.106 के नियम P48 के अनुसार, विशिष्ट विषय के पश्चात, शब्दकोष की वर्ग संख्या ऊर्जा श्रेणी में विषय विधि (SD) के द्वारा निर्मित की जाती है। अत: शीर्षक ‘समाज शास्त्र का शब्दकोष’ की वर्ग संख्या Y : (P152:4)k होगी। इस वर्ग संख्या में एकल संख्या 152 हिन्दी भाषा को दर्शाती है जिसमें शब्दकोष के शब्द दिए गए हैं। उदाहरणार्थ – शीर्षक : International Encyclopedia of Natural Science (Published 1968) पक्ष विश्लेषण : Natural Science (MC), Encyclopedia (ACI), International [P]
1968 [P2] वर्ग संख्या : 2k1, N68 शीर्षक : Herald of Library Science (1962) पक्ष विश्लेषण : Library Science (MC), Periodical (ACI), India [P], 1962[P2] वर्ग संख्या : 2m44, N62 | जीवनी को वर्गीकृत करने के लिए दो अलग-अलग एकल संख्याऐं प्रयुक्त होती हैं। 1. यदि किसी विषय से संबंधित व्यक्ति की जीवनी का वर्गीकरण करना है तो w एकल संख्या का प्रयोग होगा। 2. यदि किसी राजनीतिज्ञ, संत, अथवा उद्योगपति जैसे व्यक्ति की जीवनी वर्गीकृत करनी हो तो एकल संख्या y7 का प्रयोग किया जाता है। उदाहरणार्थ – | शीर्षक : LENIN – a Biography – born 1870 पक्ष विश्लेषण | : History (MC) Russia [P] Biography(ACI), 1870 [P] वर्ग संख्या : V58y7M70 शीर्षक | |: Jawahar Lal Nehru – Biography – born 1869 पक्ष विश्लेषण | : History (MC) India [P], Biography(ACI), 1869 [P] वर्ग संख्या : V44y7M69 शीर्षक 1: Ramanujan : An Autobiography – born 1892 पक्ष विश्लेषण | : Mathematics (MC) Autobiography (ACI), 1882 [P] वर्ग संख्या : BwM87 शीर्षक : Librarian looks back : An Autobiography of Dr. SR

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